॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥  ·  स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा
मंदिर समय+91 94163 15729
हांसी गीता भवन का मंदिर और परिसर

हांसी · हरियाणा

स्थापना · 3 अक्टूबर 1968

हांसी गीता भवन ट्रस्ट

गीता के ज्ञान की एक जीवंत संस्था

गीता को जानें। गीता को समझें। गीता को जिएँ।

Know the Gita. Understand the Gita. Live the Gita.

संस्थागत स्वरूप

उपासना, ज्ञान, संस्कार और सेवा का पवित्र घर।

हांसी गीता भवन उपासना, अध्ययन, संस्कार, आत्मचिंतन और सेवा का केंद्र है।

हमारा दायित्व केवल परंपरा की रक्षा करना नहीं, बल्कि उसके प्रकाश को आने वाली पीढ़ियों के जीवन तक पहुँचाना है।

हांसी गीता भवन में सत्संग
भवन में सत्संग — सबके लिए खुला

दृष्टि और ध्येय

हम क्या सुरक्षित रखते, सिखाते और बनाते हैं।

ऐसी पीढ़ियाँ जो श्रीकृष्ण में आस्था रखते हुए गीता की दृष्टि से जीवन जिएँ — विवेक में स्पष्ट, चरित्र में दृढ़, कर्म में अनुशासित और लोककल्याण के प्रति उत्तरदायी हों।

गीता के ज्ञान को सरल, गंभीर और जीवनोपयोगी रूप में पहुँचाना — ताकि ज्ञान विवेक बने, भक्ति आचरण में उतरे और आत्मविकास सेवा में परिणत हो।

गीता अध्ययनमूल पाठ पर आधारित अध्ययन, चिंतन और संवाद।
युवा और संस्कारजीवन के निर्णयों के लिए चरित्र, आत्म-संयम और धर्म।
भक्ति और साधनाश्रीकृष्ण से जीवंत संबंध, जो आचरण में व्यक्त हो।
सेवा और समाजगरिमा के साथ और अहंकार के बिना किया गया करुणामय कर्म।

हमारा मार्गदर्शक प्रश्न

क्या हम लोगों को गीता समझने और जीने में सहायता कर रहे हैं — और उसके माध्यम से श्रीकृष्ण के निकट ला रहे हैं?

संस्थागत यात्रा

ज्ञान से लोककल्याण तक।

श्रीकृष्ण → गीता → ज्ञान → विवेकधर्म → कर्म → सेवा → लोकसंग्रह

श्रीकृष्ण आध्यात्मिक केंद्र हैं; गीता उनकी शिक्षा पहुँचाती है। ज्ञान विवेक में परिपक्व हो; विवेक धर्म को प्रकट करे; धर्म कर्म को दिशा दे; और कर्म सेवा व लोकसंग्रह — समाज के कल्याण और स्थिरता — के रूप में खिले।

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥

भगवद्गीता 3.20
ट्रस्ट परिसर में संस्थापकों का स्मारक
परिसर में संस्थापकों का स्मारक

नेतृत्व

एक पीढ़ी में स्थापित, अगली के लिए धरोहर।

ट्रस्ट की स्थापना 3 अक्टूबर 1968 को श्री कन्हैया लाल गर्ग (के.एल. गर्ग) ने श्रीमती शान्ता गर्ग तथा हांसी और हिसार के तीन अन्य न्यासियों के साथ की। आज इसका नेतृत्व श्री निखिलेश गर्ग करते हैं।

यह संस्था हमारी संपत्ति नहीं; यह आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है, जिसकी रक्षा और संवर्धन का दायित्व हमें सौंपा गया है।