
हमारे मूल्य
हमारा सच्चा मापदंड परिवर्तन है।
HGB की सफलता केवल उपस्थिति, भवनों, उत्सवों या पाठ से नहीं मापी जा सकती। हमारा सच्चा मापदंड परिवर्तन है।
न्यासी धर्म
छह प्रतिबद्धताएँ, इसी क्रम में।
ये हांसी गीता भवन के हर न्यासी और न्यासियों की हर पीढ़ी को बाँधती हैं।
कोई व्यक्ति, परिवार, दाता, न्यासी या पीढ़ी हांसी गीता भवन के उद्देश्य से कभी बड़ी नहीं होगी।
हमारा युवा आदर्श
वह पीढ़ी जिसे हम गढ़ना चाहते हैं।
हम ऐसी युवा पीढ़ी का निर्माण करना चाहते हैं जो सामर्थ्यवान हो, पर संवेदनहीन नहीं; जो आधुनिक हो, पर अपनी आध्यात्मिक जड़ों से विमुख नहीं; जो प्रश्न करे, पर श्रद्धा भी रखे; और जो अपनी प्रगति को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, लोककल्याण का माध्यम माने।
उद्देश्य युवाओं को संसार से अलग करना नहीं है। उद्देश्य है उन्हें धर्म के साथ संसार में प्रवेश के लिए तैयार करना।
हमारी संस्थागत यात्रा
श्रीकृष्ण → गीता → ज्ञान → विवेक
↓
धर्म → कर्म → सेवा → लोकसंग्रह
श्रीकृष्ण आध्यात्मिक केंद्र हैं; गीता उनकी शिक्षा पहुँचाती है। ज्ञान विवेक में परिपक्व हो; विवेक धर्म को प्रकट करे; धर्म कर्म को दिशा दे; और कर्म सेवा व लोकसंग्रह — समाज के कल्याण और स्थिरता — के रूप में खिले।
कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि॥
सेवा
आध्यात्मिक जीवन से अलग नहीं।
शिक्षा, अन्नदान, मार्गदर्शन, ज्ञान का संरक्षण और ज़रूरतमंदों की सहायता आध्यात्मिक जीवन से अलग नहीं हैं। सही ढंग से किए जाएँ तो वे उसी की अभिव्यक्ति हैं।
सेवा में करुणा हो। सम्मान हो। अहंकार नहीं। सेवा पाने वाला, सेवा देने वाले से छोटा नहीं होता।
- शिक्षा
- अन्नदान
- मार्गदर्शन
- ज्ञान का संरक्षण
- ज़रूरतमंदों की सहायता
मूल पाठ में ये मूल्य
ऊपर का हर मूल्य गीता की एक पंक्ति है।
विषय-पृष्ठ उनके पीछे के श्लोक संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी में देते हैं, और बताते हैं कि वे एक साधारण दिन से क्या माँगते हैं।