
अध्याय 2 · आत्मा का ज्ञान
भगवद्गीता 2.23
शस्त्र इसे काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती।
श्रीभगवान्
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥
nainaṁ chindanti śastrāṇi nainaṁ dahati pāvakaḥ / na cainaṁ kledayantyāpo na śoṣayati mārutaḥ
इसे शस्त्र नहीं काटते, अग्नि नहीं जलाती, जल नहीं भिगोता, और वायु नहीं सुखाती।
English · Weapons do not cut it. Fire does not burn it. Water does not wet it. Wind does not dry it.
अर्थ
शस्त्र इसे काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती।
इसे शस्त्र नहीं काटते, अग्नि नहीं जलाती, जल नहीं भिगोता, वायु नहीं सुखाती।
यह ट्रस्ट का अपना पाठ है, इसी वेबसाइट के लिए लिखा गया। ऊपर का श्लोक मूल पाठ है।
यह श्लोक कहाँ खड़ा है
आत्मा और बदलता हुआ शरीर
अध्याय 22.11–30
श्रीकृष्ण अविनाशी आत्मा को स्थापित करते हैं और उस शोक को चुनौती देते हैं जो नाशवान को ही पूरा व्यक्ति मान लेने से उपजा है।
यह श्लोक प्रसंग के मध्य विकास में आता है।
सामान्य प्रश्न
भगवद्गीता 2.23 का अर्थ क्या है?
शस्त्र इसे काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती। इसे शस्त्र नहीं काटते, अग्नि नहीं जलाती, जल नहीं भिगोता, वायु नहीं सुखाती।
भगवद्गीता 2.23 कौन बोलता है?
श्रीभगवान्। वक्ता पाठ की अपनी उवाच पंक्ति से लिया गया है, श्लोक-क्रमांक से अनुमानित नहीं।
