
पाठ से गिना गया
गीता कौन बोलता है।
भगवद्गीता एक संवाद है, और उसमें चार स्वर समान रूप से नहीं सुनाई देते। ये गणनाएँ स्वयं पाठ से ली गई हैं।
भगवद्गीता के 700 श्लोकों में से श्रीकृष्ण 574 बोलते हैं, अर्जुन 85, सञ्जय 40, और धृतराष्ट्र 1 — वह आरंभिक प्रश्न जिससे सारा संवाद आरंभ होता है, और उनकी एकमात्र पंक्ति।
वक्ता के अनुसार श्लोक
| वक्ता | श्लोक | अंश | कहाँ |
|---|---|---|---|
| श्रीकृष्ण | 574 | 82.0% | 18 में से 17 अध्याय |
| अर्जुन | 85 | 12.1% | 18 में से 13 अध्याय |
| सञ्जय | 40 | 5.7% | अ. 1, अ. 2, अ. 11, अ. 18 |
| धृतराष्ट्र | 1 | 0.1% | अ. 1 |
| कुल | 700 | 100% | 18 अध्याय |
ट्रस्ट के लिप्यंतरण में प्रत्येक श्लोक के साथ अंकित वक्ता से गिना गया।
अध्याय-दर-अध्याय
| अ. | नाम | श्लोक | श्रीकृष्ण | अर्जुन | सञ्जय | धृतराष्ट्र |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | अर्जुनविषादयोग | 47 | · | 22 | 24 | 1 |
| 2 | साङ्ख्ययोग | 72 | 63 | 6 | 3 | · |
| 3 | कर्मयोग | 43 | 40 | 3 | · | · |
| 4 | ज्ञानकर्मसंन्यासयोग | 42 | 41 | 1 | · | · |
| 5 | कर्मसंन्यासयोग | 29 | 28 | 1 | · | · |
| 6 | ध्यानयोग | 47 | 42 | 5 | · | · |
| 7 | ज्ञानविज्ञानयोग | 30 | 30 | · | · | · |
| 8 | अक्षरब्रह्मयोग | 28 | 26 | 2 | · | · |
| 9 | राजविद्याराजगुह्ययोग | 34 | 34 | · | · | · |
| 10 | विभूतियोग | 42 | 35 | 7 | · | · |
| 11 | विश्वरूपदर्शनयोग | 55 | 14 | 33 | 8 | · |
| 12 | भक्तियोग | 20 | 19 | 1 | · | · |
| 13 | क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग | 34 | 34 | · | · | · |
| 14 | गुणत्रयविभागयोग | 27 | 26 | 1 | · | · |
| 15 | पुरुषोत्तमयोग | 20 | 20 | · | · | · |
| 16 | दैवासुरसम्पद्विभागयोग | 24 | 24 | · | · | · |
| 17 | श्रद्धात्रयविभागयोग | 28 | 27 | 1 | · | · |
| 18 | मोक्षसंन्यासयोग | 78 | 71 | 2 | 5 | · |
सर्वाधिक प्रयुक्त शब्द
700 में से कितने श्लोकों में प्रत्येक शब्द आता है, समास-रूपों सहित। यह प्रयोग की गणना है, चर्चा की नहीं — इसका अर्थ क्या है और क्या नहीं, इसकी पूरी टिप्पणी शब्दावली पृष्ठ पर है।
| शब्द | अर्थ | श्लोक |
|---|---|---|
| कर्म karma | कर्म | 115 |
| आत्मन् ātman | आत्मा | 110 |
| योग yoga | योग | 93 |
| ज्ञान jñāna | ज्ञान | 74 |
| मनस् manas | मन | 51 |
| ब्रह्मन् brahman | ब्रह्म | 44 |
| मोह moha | मोह | 43 |
| सुख sukha | सुख | 40 |
| भक्ति bhakti | भक्ति | 39 |
| बुद्धि buddhi | बुद्धि | 39 |
| सङ्ग saṅga | आसक्ति | 39 |
| यज्ञ yajña | यज्ञ | 38 |
| काम kāma | काम | 37 |
| मोक्ष mokṣa | मोक्ष | 34 |
| सत्त्व sattva | सत्त्व | 32 |
| गुण guṇa | गुण | 30 |
| दुःख duḥkha | दुःख | 28 |
| धर्म dharma | धर्म | 27 |
| पुरुष puruṣa | पुरुष | 27 |
| रजस् rajas | रजस् | 25 |
सम्पूर्ण संग्रह
सम्पूर्ण पाठ लीजिए।
सभी 700 श्लोक एक फ़ाइल में: देवनागरी, IAST, ट्रस्ट के अंग्रेज़ी और हिंदी अनुवाद, प्रत्येक श्लोक का वक्ता, और उसमें प्रयुक्त संस्कृत शब्द। वही सामग्री जो वेबसाइट पर है, उसी स्रोत से उसी समय बनाई गई, ताकि दोनों में भेद संभव ही न हो।
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शर्तें
संस्कृत पाठ सार्वजनिक क्षेत्र में है। इसे यहाँ प्रकाशित संस्करणों से लिया गया और श्लोक-दर-श्लोक दूसरे संस्करण से मिलाया गया; जहाँ दोनों में भेद था, वहाँ तीसरा देखा गया।
अंग्रेज़ी और हिंदी अनुवाद ट्रस्ट के अपने हैं, इसी वेबसाइट के लिए लिखे गए, और उनका कॉपीराइट ट्रस्ट के पास है। इस वेबसाइट पर कहीं भी किसी अन्य का अनुवाद नहीं है। हांसी गीता भवन ट्रस्ट को श्रेय देकर और इस पृष्ठ का सूत्र देकर इन्हें स्वतंत्र रूप से उद्धृत किया, पढ़ाया और आगे बढ़ाया जा सकता है।
उद्धरण कैसे दें
Hansi Gita Bhawan Trust. The Bhagavad Gita: 700 verses, Sanskrit with English and Hindi translation. Hansi, Haryana. https://gitabhawan.org.in/gita/research
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