॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा

अध्याय 5 · संन्यास का योग
भगवद्गीता 5.18
ज्ञानी सबको समान दृष्टि से देखते हैं।
श्रीभगवान्
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।
शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥
vidyāvinayasampanne brāhmaṇe gavi hastini / śuni caiva śvapāke ca paṇḍitāḥ samadarśinaḥ
विद्या और विनय से सम्पन्न ब्राह्मण में, गाय में, हाथी में, तथा कुत्ते और चाण्डाल में भी, पण्डित समान दृष्टि रखते हैं।
English · The wise look with an equal eye on a brahmin who has learning and humility, on a cow, on an elephant, and on a dog and a man who cooks dogs.
अर्थ
ज्ञानी सबको समान दृष्टि से देखते हैं।
ज्ञानी विद्या और विनय से युक्त ब्राह्मण में, गाय में, हाथी में, कुत्ते में और चांडाल में एक ही तत्त्व देखते हैं।
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