॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा

अध्याय 6 · ध्यान का योग
भगवद्गीता 6.5
स्वयं को स्वयं से ऊपर उठाओ।
श्रीभगवान्
उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥
uddharedātmanātmānaṁ nātmānamavasādayet / ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ
अपने आप को अपने ही बल से ऊपर उठाओ, अपने आप को गिरने मत दो। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु।
English · Lift yourself by your own effort; do not let yourself sink. You are your own friend, and you are your own enemy.
अर्थ
स्वयं को स्वयं से ऊपर उठाओ।
अपने द्वारा अपना उद्धार करो; स्वयं को गिरने मत दो। क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है, और आत्मा ही आत्मा का शत्रु।
यह ट्रस्ट का अपना पाठ है, इसी वेबसाइट के लिए लिखा गया। ऊपर का श्लोक मूल पाठ है।
