॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा
हांसी गीता भवन ट्रस्टहांसी · हरियाणा
शांत जलधारा के बीच खिले कमल पर बैठी आकृति, हृदय में ज्योति, किनारों पर चलते एक बालक, एक युवक, गठरी लिए एक पथिक और एक वृद्ध, और आगे बैठे देखते श्रीकृष्ण तथा अर्जुन

अध्याय 6 · ध्यान का योग

भगवद्गीता 6.5

स्वयं को स्वयं से ऊपर उठाओ।

श्रीभगवान्

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् ।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

uddharedātmanātmānaṁ nātmānamavasādayet / ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ

अपने आप को अपने ही बल से ऊपर उठाओ, अपने आप को गिरने मत दो। मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु।

English · Lift yourself by your own effort; do not let yourself sink. You are your own friend, and you are your own enemy.

अर्थ

स्वयं को स्वयं से ऊपर उठाओ।

अपने द्वारा अपना उद्धार करो; स्वयं को गिरने मत दो। क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है, और आत्मा ही आत्मा का शत्रु।

यह ट्रस्ट का अपना पाठ है, इसी वेबसाइट के लिए लिखा गया। ऊपर का श्लोक मूल पाठ है।

यह श्लोक कहाँ खड़ा है

आत्म-संयम और सच्चा संन्यास

अध्याय 66.1–9

मन या आत्मा मित्र भी हो सकता है और शत्रु भी; भिन्न व्यक्तियों के प्रति समता का सूत्र आता है।

यह श्लोक प्रसंग के मध्य विकास में आता है।

ट्रस्ट का विषयमन

मेरा ध्यान बार-बार कहाँ खिंच जाता है, और कौन-सा अभ्यास उसे लौटा लाता है?

इसे इसके सूत्र के साथ पढ़िए: 2.60–67 · 3.41–43 · 6.5–6 · 6.26 · 6.33–36 · 17.16

आत्मा — मित्र या शत्रु

श्लोक कहता है कि अपनी ही संयत अंतःकरण-शक्ति से स्वयं को ऊपर उठाओ, गिराओ नहीं। इसे दुःख के लिए लोगों को दोषी ठहराने का हथियार नहीं बनाना चाहिए; इसका तात्कालिक विषय आत्म-संयम है।

और गहराई में · 6.6, 6.26, 6.35 और 17.16 के साथ पढ़िए।

हांसी गीता भवन ट्रस्ट · द गीता फ़ॉर लाइफ़

किन विषयों में

इस श्लोक के शब्द

ये इसलिए दिए गए हैं कि ऊपर के संस्कृत में वह शब्द आता है — यह जाँचने योग्य तथ्य है, व्याख्या नहीं।

सामान्य प्रश्न

भगवद्गीता 6.5 का अर्थ क्या है?

स्वयं को स्वयं से ऊपर उठाओ। अपने द्वारा अपना उद्धार करो; स्वयं को गिरने मत दो। क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है, और आत्मा ही आत्मा का शत्रु।

भगवद्गीता 6.5 कौन बोलता है?

श्रीभगवान्। वक्ता पाठ की अपनी उवाच पंक्ति से लिया गया है, श्लोक-क्रमांक से अनुमानित नहीं।

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