
गीता में कौन कौन है
द्रौपदी
पाँचों पांडवों की पत्नी और वह रानी जिनका अपमान युद्ध से पहले के निर्णायक नैतिक विच्छेदों में एक बन जाता है।
भगवद्गीता में द्रौपदी कौन हैं?
पाँचों पांडवों की पत्नी और वह रानी जिनका अपमान युद्ध से पहले के निर्णायक नैतिक विच्छेदों में एक बन जाता है। गीता में वे नहीं बोलतीं, पर जो पाठक उनकी कथा नहीं जानता वह यह नहीं समझ सकता कि कुरुक्षेत्र में “परिवार” और “धर्म” शब्द स्नेह के साथ-साथ संचित अन्याय भी क्यों ढोते हैं।
हांसी गीता भवन ट्रस्ट · द गीता फ़ॉर लाइफ़
गीता में इनका महत्त्व क्यों है
गीता में वे नहीं बोलतीं, पर जो पाठक उनकी कथा नहीं जानता वह यह नहीं समझ सकता कि कुरुक्षेत्र में “परिवार” और “धर्म” शब्द स्नेह के साथ-साथ संचित अन्याय भी क्यों ढोते हैं।
संबंध
पाँचों पांडवों की पत्नी और द्रुपद की पुत्री; धृष्टद्युम्न की बहन।
युद्ध से पहले का विच्छेद
सभा पर्व का द्यूत-प्रसंग राजसभा में द्रौपदी के साथ हुए व्यवहार को परिवार के नैतिक और राजनीतिक विघटन के केंद्र में रखता है। जब आज का पाठक 1.31–44 में अर्जुन को कुल, पाप और सामाजिक विनाश की बात करते हुए सुनता है, तब यह इतिहास अनिवार्य हो जाता है (व्यास, अनु. गांगुली, 1883–1896, सभा पर्व)।
पाठक के लिए सावधानी
अर्जुन की करुणा को इस तरह नहीं पढ़ना चाहिए मानो इस रणभूमि का कोई नैतिक पूर्व-इतिहास ही न हो। महाकाव्य पहले ही गंभीर अन्याय, विफल संयम और विफल समझौता दिखा चुका है। पहला अध्याय यह पूछता है कि जब कुल का स्नेह और न्याय का उत्तरदायित्व आपस में टकराएँ, तब मनुष्य कैसे कर्म करे।
क्रम से पढ़ें
महाकाव्य-पृष्ठभूमि → 1.31–44; साथ ही उद्योग पर्व की शांति-वार्ताएँ।
