॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा
हांसी गीता भवन ट्रस्टहांसी · हरियाणा
कुरुक्षेत्र के मैदान पर सूर्योदय, रक्तिम आकाश के नीचे दूर खड़ी दोनों सेनाएँ

गीता में कौन कौन है

कर्ण

महान योद्धा, दुर्योधन के घनिष्ठ सहयोगी, अर्जुन के प्रतिद्वंद्वी।

भगवद्गीता में कर्ण कौन हैं?

महान योद्धा, दुर्योधन के घनिष्ठ सहयोगी, अर्जुन के प्रतिद्वंद्वी। गीता के संवाद में कर्ण कोई प्रमुख बोलने वाले पात्र नहीं हैं, फिर भी वे अत्यंत आवश्यक पृष्ठभूमि हैं। दुर्योधन से उनका संबंध और अर्जुन से उनकी प्रतिद्वंद्विता दिखाते हैं कि कृतज्ञता, निष्ठा, पहचान और धर्म किस तरह अलग-अलग दिशाओं में खींच सकते हैं।

हांसी गीता भवन ट्रस्ट · द गीता फ़ॉर लाइफ़

संबंध

दुर्योधन के सबसे निकट के वीर और अर्जुन के महान युद्ध-प्रतिद्वंद्वी। व्यापक महाकाव्य यह भी प्रकट करता है कि कर्ण कुंती के प्रथम पुत्र हैं, जिससे यह प्रतिद्वंद्विता कथा के बड़े भाग में अनजाने ही भाइयों के बीच की प्रतिद्वंद्विता बन जाती है।

इनके लिए दुर्योधन का महत्त्व

दुर्योधन की मान्यता और संरक्षण कृतज्ञता तथा निष्ठा का टिकाऊ बंधन बनाते हैं। इसलिए कर्ण युद्ध में मित्रता, मान, स्थान, प्रतिद्वंद्विता और छिपे हुए जन्म के परस्पर उलझे दावे लेकर उतरते हैं।

गीता से प्रासंगिकता

गीता के संवाद में कर्ण कोई प्रमुख स्वर नहीं हैं, और यहाँ उन्हें श्लोक-व्याख्या में जबरन नहीं डाला गया। यहाँ उनका मूल्य संदर्भ का है: वे दिखाते हैं कि दोनों सेनाओं के पीछे कितना अनकहा इतिहास खड़ा है।

क्रम से पढ़ें

पहले अध्याय की महाकाव्य-पृष्ठभूमि; उनके बाद के रणभूमि-क्रम के लिए कर्ण पर्व देखें (व्यास, अनु. गांगुली, 1883–1896, कर्ण पर्व)।

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