॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा
हांसी गीता भवन ट्रस्टहांसी · हरियाणा
दो मार्ग अलग होते — एक भोर और मंदिर की ओर, दूसरा रक्तिम छाया में सँकरा होता

अध्याय 16 · दैवी और आसुरी सम्पदा

भगवद्गीता 16.24

कर्तव्य-अकर्तव्य में शास्त्र प्रमाण है।

श्रीभगवान्

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ ।
ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि ॥

tasmācchāstraṁ pramāṇaṁ te kāryākāryavyavasthitau / jñātvā śāstravidhānoktaṁ karma kartumihārhasi

इसलिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं, यह तय करने में शास्त्र को ही अपना प्रमाण मानो। शास्त्र का विधान जानकर तुम्हें यहाँ अपना कर्म करना चाहिए।

English · So let the scriptures be your measure in settling what should be done and what should not. Know what the scriptures lay down, and do your work here accordingly.

अर्थ

कर्तव्य-अकर्तव्य में शास्त्र प्रमाण है।

क्या करना चाहिए और क्या नहीं — इसके निर्णय में शास्त्र को प्रमाण मानो। शास्त्र के विधान को जानकर ही कर्म करो।

यह ट्रस्ट का अपना पाठ है, इसी वेबसाइट के लिए लिखा गया। ऊपर का श्लोक मूल पाठ है।

किन विषयों में

इस श्लोक के शब्द

ये इसलिए दिए गए हैं कि ऊपर के संस्कृत में वह शब्द आता है — यह जाँचने योग्य तथ्य है, व्याख्या नहीं।

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