॥ श्रीकृष्णाय नमः ॥ · स्थापना 3 अक्टूबर 1968 · हांसी, हरियाणा

अध्याय 4 · ज्ञान और कर्म-संन्यास
भगवद्गीता 4.34
प्रणाम, प्रश्न और सेवा से इसे जानो।
श्रीभगवान्
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
tadviddhi praṇipātena paripraśnena sevayā / upadekṣyanti te jñānaṁ jñāninastattvadarśinaḥ
इसे प्रणाम करके, प्रश्न पूछकर और सेवा के द्वारा जानो। जो ज्ञानी हैं और तत्त्व को देखते हैं, वे तुम्हें वह ज्ञान सिखाएँगे।
English · Learn this by bowing down, by asking questions, and by service. Those who know, who see things as they are, will teach that knowledge to you.
अर्थ
प्रणाम, प्रश्न और सेवा से इसे जानो।
तत्त्व को जानने वाले ज्ञानियों के पास जाकर — प्रणाम से, जिज्ञासा भरे प्रश्नों से, और सेवा से — उस ज्ञान को जानो। वे तुम्हें उपदेश देंगे।
यह ट्रस्ट का अपना पाठ है, इसी वेबसाइट के लिए लिखा गया। ऊपर का श्लोक मूल पाठ है।
